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devi aarti

Ashwinshuddha paksh amba

आश्विनशुद्धपक्षीं अंबा बैसलि सिंहासनी हो ॥ प्रतिपदेपासून घटस्थापना ती करुनी हो ॥ मूलमंत्रजप करुनी भोंवते रक्षक ठेउनी हो ॥ ब्रह्माविष्णुरुद्र …

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Durge durghat bhari

दुर्गे दुर्घट भारी तुजविण संसारीं । अनाथ नाथे अंबे करुणा विस्तारीं ॥ वारी वारी जन्ममरणातें वारी। हारी पडलों आतां संकट …

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